तेरे द्वार पे आने वालो ने, क्या अजब नज़ारा देखा है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तेरे द्वार पे आने वालो ने,

क्या अजब नज़ारा देखा है,

हर और निराले जलवे हैं,

जहाँ भवन तुम्हारा देखा है,

तेरे द्वार पे आने वालों ने,

क्या अजब नज़ारा देखा है ॥

पत्थर को चीर चट्टानों से,

क्या सुन्दर गुफा बनाई है,

चरणों से निकली गंगधारा,

ये कैसी लीला रचाई है,

हर डाल डाल हर पत्ते में,

माँ नूर तुम्हारा देखा है,

तेरे द्वार पे आने वालों ने,

क्या अजब नज़ारा देखा है ॥

दरबार में ध्यानु ने आकर,

सर काट के अपना चढ़ाया था,

माँ शक्ति आद्य भवानी ने,

फिर चमत्कार दिखलाया था,

ध्यानु के सर को जोड़ दिया,

उपकार तुम्हारा देखा है,

तेरे द्वार पे आने वालों ने,

क्या अजब नज़ारा देखा है ॥

‘बलवीर’ कहे सुन जगदम्बे,

क्यों दर से मुझे भुलाया है,

‘आयोजिका’ कहे सुन जगदम्बे,

क्यों दर से मुझे भुलाया है,

एक बार करम अपना कर दो,

माँ दास तुम्हारा आया है,

मैं कैसे सबर करूँ दिल में,

दीदार तुम्हारा देखा है,

तेरे द्वार पे आने वालों ने,

क्या अजब नज़ारा देखा है ॥

तेरे द्वार पे आने वालो ने,

क्या अजब नज़ारा देखा है,

हर और निराले जलवे हैं,

जहाँ भवन तुम्हारा देखा है,

तेरे द्वार पे आने वालों ने,

क्या अजब नज़ारा देखा है ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।