तेरे दरशन को गणराजा, तेरे दरबार आए है

पारंपरिक
श्री गणेश भजन Bhajan Vighneswaray Bhajan
॥ दोहा ॥

तेरे दर्शन को गणराजा ॥

॥ चौपाई ॥

दोहा – नसीब वालों को हे गणराजा,

तेरा दीदार होता है,

जिसपे होता है नजरेकरम,

उसका बेडा पार होता है ॥

तेरे दर्शन को गणराजा,

तेरे दरबार आए है,

तेरे दरबार आए है,

तेरे दरबार आए है,

तेरे दरशन को गणराजा,

तेरे दरबार आए है ॥

सुना है मैंने गणराया,

तुम्हे लड्डू ही भाते है,

सुना है मैंने गणराया,

तुम्हे लड्डू ही भाते है,

तुम्हारे भोग में भगवन,

हाँ लड्डू साथ लाए है,

तेरे दरशन को गणराजा,

तेरे दरबार आए है ॥

तुम्हे दूर्वा सदा चढ़ती,

लोग ऐसा सदा करते,

तुम्हे दूर्वा सदा चढ़ती,

लोग ऐसा सदा करते,

बेल पाती के संग संग में,

हाँ दूर्वा हार लाए है,

तेरे दरशन को गणराजा,

तेरे दरबार आए है ॥

तुम्हे वस्त्रों में पीताम्बर,

पहनते हमने देखा है,

तुम्हे वस्त्रों में पीताम्बर,

पहनते हमने देखा है,

की दरजी से भी सिलवाकर,

तुम्हारे वस्त्र लाए है,

तेरे दरशन को गणराजा,

तेरे दरबार आए है ॥

सुना है ताजे फूलों के,

तुम्हे गजरे सुहाते है,

सुना है ताजे फूलों के,

तुम्हे गजरे सुहाते है,

बागों से ‘सुमन योगी’,

सुगन्धित फुल लाए है,

तेरे दरशन को गणराजा,

तेरे दरबार आए है ॥

तेरे दर्शन को गणराजा,

तेरे दरबार आए है,

तेरे दरबार आए है,

तेरे दरबार आए है,

तेरे दरशन को गणराजा,

॥ दोहा ॥

तेरे दरबार आए है ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भजन: तेरे दरशन को गणराजा, तेरे दरबार आए है | Bhajan: Tere Darshan Ko Ganraja Tere Darbar Aaye Hai Lyrics Hindi Aur English Main

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।