तेरे दर पे आया हूँ कुछ सोच के आया हूँ

संजय मित्तल
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॥ दोहा ॥

द्वार तिहारे जो पड़े, खाली कबहुँ न जाए।
श्याम कृपा की छाँव में, सब दुख दूर भगाए॥

॥ चौपाई ॥

तेरे दर पे आया हूँ, कुछ सोच के आया हूँ।
खाली ना लौटाना मुझे, आस लगा के आया हूँ॥
तेरे दर पे आया हूँ॥

सुना है तेरे दर से कोई, खाली नहीं जाता।
जो भी रोता आता है, वो हँसता हुआ जाता॥
मैं भी दुखियारा बाबा, झोली फैला के आया हूँ।
तेरे दर पे आया हूँ॥

तेरी एक नज़र की खातिर, नैन तरसते हैं।
मेरे इस दिल के आँसू, पल पल बरसते हैं॥
अपनी कृपा का अमृत, पीने मैं आया हूँ।
तेरे दर पे आया हूँ॥

संजय मित्तल की विनती, सुन लो खाटू वाले।
तेरे चरणों में सांवरिया, जीवन अर्पण कर डाले॥
तेरे दर पे आया हूँ, कुछ सोच के आया हूँ॥

॥ दोहा ॥

सांवरिया सरकार की, जय बोलो निष्काम।
संजय मित्तल को मिले, श्री चरणों का धाम॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

खाटू धाम पहुँचकर भक्त की निश्चल भावना और बाबा श्याम से जीवन की झोली भरने की भावभीनी विनती इस भजन में व्यक्त हुई है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।