द्वार तिहारे जो पड़े, खाली कबहुँ न जाए।
श्याम कृपा की छाँव में, सब दुख दूर भगाए॥
तेरे दर पे आया हूँ, कुछ सोच के आया हूँ।
खाली ना लौटाना मुझे, आस लगा के आया हूँ॥
तेरे दर पे आया हूँ॥
सुना है तेरे दर से कोई, खाली नहीं जाता।
जो भी रोता आता है, वो हँसता हुआ जाता॥
मैं भी दुखियारा बाबा, झोली फैला के आया हूँ।
तेरे दर पे आया हूँ॥
तेरी एक नज़र की खातिर, नैन तरसते हैं।
मेरे इस दिल के आँसू, पल पल बरसते हैं॥
अपनी कृपा का अमृत, पीने मैं आया हूँ।
तेरे दर पे आया हूँ॥
संजय मित्तल की विनती, सुन लो खाटू वाले।
तेरे चरणों में सांवरिया, जीवन अर्पण कर डाले॥
तेरे दर पे आया हूँ, कुछ सोच के आया हूँ॥
सांवरिया सरकार की, जय बोलो निष्काम।
संजय मित्तल को मिले, श्री चरणों का धाम॥