तेरे दर दी पौड़ियाँ माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जय माता दी

इस वार नवराते मां, तेरे दर ते मनावांगे

तेरे दर दी पौड़ियाँ मां असी चुमदे आवांगे

हर इक पैंडे ते मां जैकारे लगावांगे

तेरे दर दी पौड़ियाँ मैं असी चुमदे आवांगे

इक इक पौड़ी नू मां गल्ल दिल दी दसांगे

असी भंगड़े पावांगे, रज्ज रज्ज के नचांगे

तेरे जैकारे मां, गज्ज वज्ज के बुलावेंगे

तेरे दर दी पौड़ियाँ मैं असी चुमदे आवांगे

संतो की वाणी तेरे वल तकदे, तू मेरे वल तकया मां

मैं किन्ना किस्मत वाला हां, तू हथ सिर ते रख्या मां

हर पल तेरा अम्मिए, असी शुक्र मनावांगे

तेरे दर दी पौड़ियाँ मैं असी चुमदे आवांगे

इस वार अंश वी माँ, चल दर ते आया ऐ

तेरे नाम दे रंग विच माँ, तन मन रंगवाया ऐ

तेरे सामने बह के माँ, तेरी भेटां गावांगे

तेरे दर दी पौड़ियाँ मैं असी चुमदे आवांगे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।