तेरा शुक्र करा बप्पा, तेरा शुक्र करा

पारंपरिक
श्री गणेश भजन Bhajan Shri Vinayak Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तेरा शुक्र करा वे बप्पा, मैं तेरा शुक्र करां

तेरा शुक्र करा वे गणपति , मैं तेरा शुक्र करां

तुसां लगिया तोड़ निभाईआं, मैं तेरा शुक्र करा

दरबार बुलाया, शुक्र करां

चरना विच लाया, शुक्र करां

दोषा नू भुलाया, शुक्र करां

आके अपनाया, शुक्र करां

अहंकार मिटाया, शुक्र करां

धीरज उपजाया, शुक्र करां

दे के न जताया, शुक्र करां

सानु पार लगाया,

तेरा शुक्र करा वे बप्पा, मैं तेरा शुक्र करां...

दिन रात बथेरा, शुक्र करां

पल पल मैं तेरा, शुक्र करां

जब होवे हनेरा, शुक्र करां

जब होवे सवेरा, शुक्र करां

सुख दुःख सब तेरा, शुक्र करां

कुछ वी नहीं मेरा, शुक्र करां

कण कण विच तेरा, शुक्र करां

दिसदा ए बसेरा,

तेरा शुक्र करा वे बप्पा , मैं तेरा शुक्र करा...

केन्दे ने सवाली, शुक्र करां

रुतबा तेरा आली, शुक्र करां

दुनिया दा वाली, शुक्र करां

तेरी शान निराली, शुक्र करां

मोड़ी न खाली, शुक्र करां

करदा लज पाली, शुक्र करां

वनडे खुशाली, शुक्र करां

डुबदी तू संभाली,

तेरा शुक्र करा वे बप्पा, मैं तेरा शुक्र करां...

दुखिया दा सहारा, शुक्र करां

सुखियानु भी प्यारा, शुक्र करां

जब जब दिलहारा, शुक्र करां

तैनू ही पुकारा, शुक्र करां

संसार ये सारा, शुक्र करां

दिल जान वे हारा, शुक्र करां

गणपति दा नज़ारा, शुक्र करां

स्वर्ग तो भी प्यारा,

तेरा शुक्र करा वे बप्पा, मैं तेरा शुक्र करां...

Santo Ki Vani Lyrics

मांगिए सो पाया, शुक्र करां

लारा नहीं लाया, शुक्र करां

बदीयां को बचाया, शुक्र करां

नेकी वल लाया, शुक्र करां

सम्मान बढ़ाया, शुक्र करां

रज रज के रजाया, शुक्र करां

समजा ना पराया, शुक्र करां

हर वचन निभाया,

तेरा शुक्र करा वे बप्पा, मैं तेरा शुक्र करां...

चंगेयां नू मिलाया, शुक्र करां

मेहनत दा खवाया, शुक्र करां

विश्वास जगाया, शुक्र करां

धन धन तेरी माया, शुक्र करां

हर कम बनाया,शुक्र करां

झुकना भी सिखाया, शुक्र करां

अश्का दा सहारा, शुक्र करां

नी मैं फल पाया,

तेरा शुक्र करा वे बप्पा, मैं तेरा शुक्र करां...

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भजन: तेरा शुक्र करा बप्पा, तेरा शुक्र करा | Bhajan: Tera Shukar Kara Bappa, Tera Shukar Kara Ke Lala Lyrics Hindi Aur English Main

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।