तीन बाण के धारी मेरे बाबा लखदातारी

संजय मित्तल
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॥ दोहा ॥

बर्बरीक बलवान तुम, दानी परम उदार।
तीन बाण तरकस सजे, महिमा अपरंपार॥

॥ चौपाई ॥

तीन बाण के धारी मेरे, बाबा लखदातारी।
सारे जग में डंका बाजे, जय हो श्याम तुम्हारी॥
तीन बाण के धारी मेरे॥

एक बाण से लक्ष्य साधे, दूजे से संहारे।
तीजे बाण से रक्षा कीन्ही, जग के तारणहारे॥
शीश दान में दे डाला, कैसी माया भारी।
सारे जग में डंका बाजे, जय हो श्याम तुम्हारी॥

खाटू में दरबार सजा है, फूलों की महकार।
नीले घोड़े पर चढ़ आया, जग का पालनहार॥
जो भी आया द्वार पे तेरे, झोली भर दी सारी।
सारे जग में डंका बाजे, जय हो श्याम तुम्हारी॥

संजय मित्तल शीश नवाए, चरणों में बलिहारी।
सदा रहे मेरे सिर पर बाबा, छत्र छाया तुम्हारी॥
तीन बाण के धारी मेरे, बाबा लखदातारी॥

॥ दोहा ॥

दान शीश का दे दिया, नाम मिला श्री श्याम।
कलयुग के अवतारी को, कोटि कोटि प्रणाम॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

महाभारत कालीन महादानी वीर बर्बरीक (खाटू श्याम जी) के तीन बाणों और शीश दान की अद्वितीय गाथा का गुणगान करता यह भजन वीरता और भक्ति का अद्भुत समन्वय है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।