बर्बरीक बलवान तुम, दानी परम उदार।
तीन बाण तरकस सजे, महिमा अपरंपार॥
तीन बाण के धारी मेरे, बाबा लखदातारी।
सारे जग में डंका बाजे, जय हो श्याम तुम्हारी॥
तीन बाण के धारी मेरे॥
एक बाण से लक्ष्य साधे, दूजे से संहारे।
तीजे बाण से रक्षा कीन्ही, जग के तारणहारे॥
शीश दान में दे डाला, कैसी माया भारी।
सारे जग में डंका बाजे, जय हो श्याम तुम्हारी॥
खाटू में दरबार सजा है, फूलों की महकार।
नीले घोड़े पर चढ़ आया, जग का पालनहार॥
जो भी आया द्वार पे तेरे, झोली भर दी सारी।
सारे जग में डंका बाजे, जय हो श्याम तुम्हारी॥
संजय मित्तल शीश नवाए, चरणों में बलिहारी।
सदा रहे मेरे सिर पर बाबा, छत्र छाया तुम्हारी॥
तीन बाण के धारी मेरे, बाबा लखदातारी॥
दान शीश का दे दिया, नाम मिला श्री श्याम।
कलयुग के अवतारी को, कोटि कोटि प्रणाम॥