तरसे नज़रिया वो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तरसे नज़रिया वो... तरसे नज़रिया वो... 2

दे दर्सन के दान वो मईया,तरसे नज़रिया वो..

चढ़- तोर मुहरन के वो...झलक देखादे वो...॥

तरसत मोर परान वो मईया...तरसे नज़रिया वो

संतो की वाणी लिरिक्स

तोरे धियान म बुड़े रहीथव, आठो पहर बर माता वो ।

मोर अरजी ल सुनबे कभू वो राखे हव बिस्वासा वो ।

चढ़- दया मया के वो... अमृत झलकादे... ॥

झन कर बेड़ बिहान वो मईया...तरसे नज़रिया वो

देखे बर हिर्दय कलपत हे, नयना दरस के पियसा वो

ये जिनगी ल पार लगादे, अटके हव मोह फासा वो

चढ़- इंदरी जुड़ाही वो... अंतस सुःख पाहि वो ॥

देदे अजब बरदान वो मईया... तरसे नज़रिया वो

सगरो जगत के तै महारानी, सरबस तोरे बासा वो ।

भाग ल मोर जगादे मईया,करदे कुछु आभासा वो ।

चढ़- सतजुगहीन मईया वो...मोर मंसा पुरादे वो ॥

गौतम करे गूनगान वो मईया... तरसे नज़रिया वो

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।