स्वामी रामशंकर

पारंपरिक
श्री राम संत साहित्य Bhakt Swami Ram Shankar Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमालः स्वामी रामशंकर

वास्तविक नाम - राम प्रकाश भट्ट

अन्य नाम - डिजिटल बाबा

गुरु - महंत स्वामी शिवचरण दास महाराज

आराध्य - शिव जी

जन्म - 1 नवंबर 1987

जन्म स्थान - देवरिया, उत्तर प्रदेश

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

भाषा - अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत

पूरी दुनिया में डिजिटल बाबा के नाम से मशहूर स्वामी राम शंकर डिजिटल और सोशल मीडिया पर अपनी आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए जाने जाते हैं। युवाओं के बीच भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देकर लुप्त होती भारतीय परंपराओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के उनके प्रयास रंग ला रहा है।

डिजिटल बाबा कांगड़ा जिले के बैजनाथ के नागेश्वर महादेव मंदिर में रहते हैं। डिजिटल बाबा स्वामी राम शंकर अपने वैचारिक आंदोलन को डिजिटल हथियारों से आगे बढ़ा रहे हैं। उनके हाथ में हमेशा लैपटॉप, मोबाइल रहता है और वह फेसबुक, व्हाट्सएप के जरिए अपने भक्तों से जुड़े रहते हैं। यही वजह है कि स्वामी राम शंकर अपनी कार्यशैली और व्यक्तित्व के कारण लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं। इस युवा साधु को डिजिटल बाबा के नाम से प्रसिद्धि मिली है.

स्वामी राम शंकर कहते हैं कि मेरा एक ही सपना है कि मैं पूरे विश्व के युवाओं को संस्कारों और जीवन मूल्यों से जोड़ने के लिए प्रेरित करता रहूं, जिससे हमारे समाज के युवाओं का आदर्श चरित्र और जीवन शैली उसमें भरी जा सके। हालाँकि उनका जीवन का सपना एक अभिनेता बनना था, उन्होंने अपने कॉलेज जीवन में महसूस किया कि दुनिया स्वार्थी है। भौतिक दुनिया की समझ ने उन्हें डिजिटल बाबा बनने के लिए प्रेरित किया। वर्तमान में डिजिटल बाबा नर्मदा परिक्रमा के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

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सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

पूरी दुनिया में डिजिटल बाबा के नाम से मशहूर स्वामी राम शंकर डिजिटल और सोशल मीडिया पर अपनी आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए जाने जाते हैं। युवाओं के बीच भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देकर लुप्त होती भारतीय परंपराओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के उनके प्रयास रंग ला रहा है। Swami Ram Shankar, known all over the world as Digital Baba, is known for his spiritual activities on digital and social media. His efforts to create awareness about the vanishing Indian traditions by promoting Indian culture among the youth is paying off.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।