॥ दोहा ॥
कनक बदन कुंडल मकर, मुकुट शीश पर हाय।
करुणा निधि दिनकर सदा, भक्तन की बलि जाय॥
॥ चौपाई ॥
जय सविता जय जय दिवाकर। सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर॥
भानु पतंग दिवाकर भास्कर। सविता हंस मार्तण्ड दिनकर॥
सप्त अश्वरथ गगन सिधारे। तिमिर समूह एक छिन में टारे॥
उदित भानु जब पूरब आवै। सकल जगत नव जीवन पावै॥
आरोग्य धन बुद्धि के दाता। तुम ही जग के जीवन त्राता॥
जो जन अर्घ्य चढ़ावै नित्य। ताहि न व्यापै रोग अनित्य॥
॥ दोहा ॥
सूर्य देव की जो करै, पूजा पाठ विधान।
तेज प्रताप आरोग्य लहि, पावै पद सम्मान॥