सुनले ओ मेरी मैया, मुझे तेरा ही सहारा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Mata Rani Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सुनले ओ मेरी मैया,

मुझे तेरा ही सहारा,

तेरा ही सहारा मुझे,

तेरा ही सहारा ॥

दूर दूर तक ओ मेरी मैया,

सूझे नहीं किनारा,

एक बार आ जाओ मैया,

मैंने तुम्हे पुकारा,

तुम बिन कौन हमारा,

माँ तुम बिन कौन हमारा,

तेरा ही सहारा मुझे,

तेरा ही सहारा ॥

नैया हमारी ओ मेरी मैया,

अब है तेरे भरोसे,

खेते खेते हार गया हूँ,

डरता हूँ लहरों से,

घिर गए काले बादल,

और छाया है अँधियारा,

तेरा ही सहारा मुझे,

तेरा ही सहारा ॥

अंधियारी रातों में मैया,

बिजली कढ़ कढ़ कढ़के,

डूब ना जाए नैया मेरी,

दिल मेरा ये धडके,

‘श्याम’ को भी तारो,

लाखों को तुमने तारा,

तेरा ही सहारा मुझे,

तेरा ही सहारा ॥

सुनले ओ मेरी मैया,

मुझे तेरा ही सहारा,

तेरा ही सहारा मुझे,

तेरा ही सहारा ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।