विन्ध्येश्वरी आरती: सुन मेरी देवी पर्वतवासनी

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती Aarti Maa Durga Aarti
॥ पावन पाठ ॥

भक्त इन पंक्तियां को स्तुति श्री हिंगलाज माता और श्री विंध्येश्वरी माता की आरती के रूप मे प्रयोग करते हैं:

सुन मेरी देवी पर्वतवासनी ।

कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥

पान सुपारी ध्वजा नारियल ।

ले तेरी भेंट चढ़ायो माँ ॥

सुन मेरी देवी पर्वतवासनी ।

कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥

सुवा चोली तेरी अंग विराजे ।

केसर तिलक लगाया ॥

सुन मेरी देवी पर्वतवासनी ।

कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥

नंगे पग मां अकबर आया ।

सोने का छत्र चडाया ॥

सुन मेरी देवी पर्वतवासनी ।

कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥

ऊंचे पर्वत बनयो देवालाया ।

निचे शहर बसाया ॥

सुन मेरी देवी पर्वतवासनी ।

कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥

सत्युग, द्वापर, त्रेता मध्ये ।

कालियुग राज सवाया ॥

सुन मेरी देवी पर्वतवासनी ।

कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥

धूप दीप नैवैध्य आर्ती ।

मोहन भोग लगाया ॥

सुन मेरी देवी पर्वतवासनी ।

कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥

ध्यानू भगत मैया तेरे गुन गाया ।

मनवंचित फल पाया ॥

सुन मेरी देवी पर्वतवासनी ।

कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।