॥ दोहा ॥
आरत कीजै श्याम पिया की, मोरछड़ी लहराय।
जो आवे खाटू के द्वारे, खाली कभी न जाय॥
॥ चौपाई ॥
सुण ले ओ सांवरिया, मेरी अरदास।
तेरे सिवा कोई नहीं, मेरे दिल के पास॥
सुण ले ओ सांवरिया, मेरी अरदास॥
दूर देश से चलकर आया, तेरे दर्शन पाने।
हाल-ए-दिल तू सब जाने, क्या तुझको बतलाने॥
सिर पे रख दो मोरछड़ी, बुझ जाए मन की प्यास।
सुण ले ओ सांवरिया, मेरी अरदास॥
कन्हैया मित्तल विनती करत, खाटू के सरकार।
अपनी कृपा बनाए रखना, जीवन के हर बार॥
॥ दोहा ॥
शीश के दानी मोदक भोगी, भक्तन के प्रतिपाल।
कन्हैया मित्तल वंदना, कीजो सदा खुशहाल॥