श्री कार्तिकेय प्रज्ञा विवर्धन स्तोत्रम्

पारंपरिक
श्री राम स्तोत्र Mantra Karthikeya Mantra
॥ पावन पाठ ॥

श्रीगणेशाय नमः।

स्कन्द उवाच।

योगीश्वरो महासेनः कार्तिकेयोऽग्निनन्दनः।

स्कन्दः कुमारः सेनानीः स्वामी शङ्करसम्भवः॥1॥

गाङ्गेयस्ताम्रचूडश्च ब्रह्मचारी शिखिध्वजः।

तारकारिरुमापुत्रः क्रौञ्चारिश्च षडाननः॥2॥

शब्दब्रह्मसमुद्रश्च सिद्धः सारस्वतो गुहः।

सनत्कुमारो भगवान् भोगमोक्षफलप्रदः॥3॥

शरजन्मा गणाधीशपूर्वजो मुक्तिमार्गकृत्।

सर्वागमप्रणेता च वाञ्छितार्थप्रदर्शनः॥4॥

संतो की वाणी स्तोत्र अष्टाविंशतिनामानि मदीयानीतियः पठेत्।

प्रत्यूषं श्रद्धया युक्तो मूको वाचस्पतिर्भवेत्॥5॥

महामन्त्रमयानीति मम नामानुकीर्तनम्।

महाप्रज्ञामवाप्नोति नात्र कार्या विचारणा॥6॥

॥ इति श्रीरुद्रयामले प्रज्ञाविवर्धनाख्यं

॥ दोहा ॥

श्रीमत्कार्तिकेयस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।