॥ दोहा ॥
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम।
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम॥
॥ चौपाई ॥
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम।
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम॥
श्याम तेरी बंसी...
कौन जाने बांसुरिया को किसकी लगी है प्यास।
राधा के मन में भी कान्हा, मीरा के मन में वास॥
एक ने पाया रूप नगर में, एक ने मन के धाम।
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम॥
श्याम तेरी बंसी...
राधा ने मधुबन में ढूँढ़ा, मीरा ने मन माहीं।
प्रेम का सागर एक ही दोनों, भेद कछू भी नाहीं॥
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम...
॥ दोहा ॥
राधा अनुराग की मूरत, मीरा वैराग्य की सूरत।
दोनों ही तर गईं तर गईं, भजि श्री कृष्ण को नाम॥