चरण कमल रज की महिमा, जाने संत सुजान।
माथे पर जो लग गई, होवे पद निर्वाण॥
श्याम तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए।
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥
श्याम तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए॥
सुनते हैं तेरी रहमत दिन रात बरसती है।
इक बूँद जो मिल जाए मन की कली खिल जाए॥
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥
यह मन बड़ा चंचल है कैसे इसे समझाऊं।
जितना इसे रोकूँ मैं उतना ही मचल जाए॥
श्याम तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए॥
नज़रों से गिराना ना चाहे जो सज़ा देना।
नज़रों से जो गिर जाए मुश्किल ही संभल पाए॥
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥
संजय मित्तल गाए महिमा, खाटू के सांवरिया की।
चरणों की शरण मिले, भव से पार उतर जाए॥
श्याम तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए॥
चरण धूलि पावन परम, तारनहार अनूप।
संजय मित्तल वंदना, जय जय श्याम स्वरूप॥