श्याम तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए

संजय मित्तल
अन्य भजन भजन संजय मित्तल
॥ दोहा ॥

चरण कमल रज की महिमा, जाने संत सुजान।
माथे पर जो लग गई, होवे पद निर्वाण॥

॥ चौपाई ॥

श्याम तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए।
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥
श्याम तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए॥

सुनते हैं तेरी रहमत दिन रात बरसती है।
इक बूँद जो मिल जाए मन की कली खिल जाए॥
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥

यह मन बड़ा चंचल है कैसे इसे समझाऊं।
जितना इसे रोकूँ मैं उतना ही मचल जाए॥
श्याम तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए॥

नज़रों से गिराना ना चाहे जो सज़ा देना।
नज़रों से जो गिर जाए मुश्किल ही संभल पाए॥
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥

संजय मित्तल गाए महिमा, खाटू के सांवरिया की।
चरणों की शरण मिले, भव से पार उतर जाए॥
श्याम तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए॥

॥ दोहा ॥

चरण धूलि पावन परम, तारनहार अनूप।
संजय मित्तल वंदना, जय जय श्याम स्वरूप॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

बाबा श्याम के श्री चरणों की एक रज-कण की महिमा का अमर भजन, जो जीव के भाग्य और जीवन को पूरी तरह से पावन और धन्य बना देती है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।