श्याम तेरे चरणों की धूल जो मिल जाए

कन्हैया मित्तल
अन्य भजन भजन कन्हैया मित्तल
॥ दोहा ॥

चरण कमल बंदौ हरिराई, जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै।
श्याम शरण में जो रहे, कोटिक संकट भंजै॥

॥ चौपाई ॥

श्याम तेरे चरणों की धूल जो मिल जाए।
सच कहता हूँ मेरी तकदीर संवर जाए॥
श्याम तेरे चरणों की धूल जो मिल जाए॥

ना धन की चाहत है, ना राज दुलारे की।
बस लगन लगी दिल में, इस खाटू वाले की॥
नैनों में बसी सूरत, मन में तू समा जाए।
श्याम तेरे चरणों की धूल जो मिल जाए॥

कन्हैया मित्तल मांगे, बस भक्ति का वरदान।
तेरे चरणों में बीते, ये जीवन का हर गान॥

॥ दोहा ॥

खाटू के सांवरिया, सुण लो दीन पुकार।
कन्हैया मित्तल शीश धरे, तारो भव से पार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भगवान के चरणों की रज मात्र से जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय और परम कल्याण होने का आर्त समर्पण भाव।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।