॥ दोहा ॥
चरण कमल बंदौ हरिराई, जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै।
श्याम शरण में जो रहे, कोटिक संकट भंजै॥
॥ चौपाई ॥
श्याम तेरे चरणों की धूल जो मिल जाए।
सच कहता हूँ मेरी तकदीर संवर जाए॥
श्याम तेरे चरणों की धूल जो मिल जाए॥
ना धन की चाहत है, ना राज दुलारे की।
बस लगन लगी दिल में, इस खाटू वाले की॥
नैनों में बसी सूरत, मन में तू समा जाए।
श्याम तेरे चरणों की धूल जो मिल जाए॥
कन्हैया मित्तल मांगे, बस भक्ति का वरदान।
तेरे चरणों में बीते, ये जीवन का हर गान॥
॥ दोहा ॥
खाटू के सांवरिया, सुण लो दीन पुकार।
कन्हैया मित्तल शीश धरे, तारो भव से पार॥