॥ दोहा ॥
शरण गहे की राखियो, लाज कन्हैया लाल।
दीन अनाथ पुकारता, हरो सकल जंजाल॥
॥ चौपाई ॥
श्याम मोहे अपनी शरण में ले लो, अपनी शरण में ले लो।
भवसागर मँझधार पड़ी है, पार किनारे लगा दो॥
काम क्रोध मद लोभ सतावे, माया मोहि भरमावे।
तेरा सहारा मिल जाए तो, जनम सुधर सब जावे॥
श्याम मोहे अपनी शरण में ले लो, अपनी शरण में ले लो॥
॥ दोहा ॥
श्री कृष्ण शरणं मम भजु, छोड़ि सकल अभिमान।
साध्वी पूर्णिमा कहत है, पावे पद निर्वान॥