श्याम हमारो धन हम श्याम के

संजय मित्तल
श्री कृष्ण भजन भजन संजय मित्तल
॥ दोहा ॥

धन दौलत सब धूल सम, श्याम नाम धन सार।
जिसके पल्ले श्याम धन, वो जग का सरदार॥

॥ चौपाई ॥

श्याम हमारो धन हम श्याम के, जीवन बीता इसी नाम पे।
श्याम हमारो धन हम श्याम के॥

ना कौड़ी चाहिए ना सोना चाँदी, हमको तो बस तेरी प्रीत भांदी।
तेरे चरणों की सेवा ही पूँजी हमारी, जय हो जय हो श्याम तुम्हारी॥
सुबह और शाम हम इसी काम के, श्याम हमारो धन हम श्याम के॥

जग वाले कहते हैं पागल दीवाना, हमने तो जाना बस श्याम घराना।
खाटू की गलियों में खो गए हम तो, तेरे ही रंग में रंग गए हम तो॥
दीवाने बन गए इस नाम के, श्याम हमारो धन हम श्याम के॥

संजय मित्तल गाए मस्ती में झूम, सारे जहाँ में मची है ये धूम।
श्याम कृपा का मिला वरदान, धन्य हुआ ये जीवन प्राण॥
श्याम हमारो धन हम श्याम के, जीवन बीता इसी नाम पे॥

॥ दोहा ॥

श्याम नाम की संपदा, कभी ना होवे क्षीण।
संजय मित्तल गावती, प्रेम सिंधु में लीन॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

प्रभु श्याम को ही अपना परम धन और सर्वस्व मानकर संसार के भौतिक प्रलोभनों से परे केवल भक्ति रस में मस्त रहने का यह मधुर पद है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।