धन दौलत सब धूल सम, श्याम नाम धन सार।
जिसके पल्ले श्याम धन, वो जग का सरदार॥
श्याम हमारो धन हम श्याम के, जीवन बीता इसी नाम पे।
श्याम हमारो धन हम श्याम के॥
ना कौड़ी चाहिए ना सोना चाँदी, हमको तो बस तेरी प्रीत भांदी।
तेरे चरणों की सेवा ही पूँजी हमारी, जय हो जय हो श्याम तुम्हारी॥
सुबह और शाम हम इसी काम के, श्याम हमारो धन हम श्याम के॥
जग वाले कहते हैं पागल दीवाना, हमने तो जाना बस श्याम घराना।
खाटू की गलियों में खो गए हम तो, तेरे ही रंग में रंग गए हम तो॥
दीवाने बन गए इस नाम के, श्याम हमारो धन हम श्याम के॥
संजय मित्तल गाए मस्ती में झूम, सारे जहाँ में मची है ये धूम।
श्याम कृपा का मिला वरदान, धन्य हुआ ये जीवन प्राण॥
श्याम हमारो धन हम श्याम के, जीवन बीता इसी नाम पे॥
श्याम नाम की संपदा, कभी ना होवे क्षीण।
संजय मित्तल गावती, प्रेम सिंधु में लीन॥