श्याम ऐसो जिया में समाए गयो री

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

श्याम ऐसो जिया में,

समाए गयो री,

मेरे तन मन की,

सुधबुध भुलाय गयो री ॥

सोहनी सूरत माधुरी मूरत,

सोहनी सूरत माधुरी मूरत,

मोहे एक झलक,

दिखाय गयो री,

मेरे तन मन की,

सुधबुध भुलाय गयो री ॥

चोरी चोरी चुपके चुपके,

चोरी चोरी चुपके चुपके,

मोहे यमुना के तट पे,

बुलाय गयो री,

मेरे तन मन की,

सुधबुध भुलाय गयो री ॥

आवरी बावरी कर गयो री मोहे,

आवरी बावरी कर गयो री मोहे,

चित्त को मेरे,

चुराय गयो री,

मेरे तन मन की,

सुधबुध भुलाय गयो री ॥

मनवा मोरा नहीं मेरे वश में,

मनवा मोरा नहीं मेरे वश में,

वो मन को मेरे,

लुभाय गयो री,

मेरे तन मन की,

सुधबुध भुलाय गयो री ॥

आकुल व्याकुल फिरूं भवन में,

आकुल व्याकुल फिरूं भवन में,

वो तो प्रेम को रोग,

लगाय गयो री,

मेरे तन मन की,

सुधबुध भुलाय गयो री ॥

कहा कहूँ सखी कैसे बताऊँ,

कहा कहूँ सखी कैसे बताऊँ,

वो तो मोहे अपनों,

बनाय गयो री,

मेरे तन मन की,

सुधबुध भुलाय गयो री ॥

श्याम ऐसो जिया में,

समाए गयो री,

मेरे तन मन की,

॥ दोहा ॥

सुधबुध भुलाय गयो री ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।