शुक्राना तेरा

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॥ पावन पाठ ॥

शुक्राना तेरा

हर पल दा, ओ दातिया, शुक्राना तेरा ll

जो भी, मेरे पास है वोह ll नज़राना तेरा

हर पल दा, ओ दातिया ll

मुझ पे, हर पल, तेरी इतनी, किरपा होई ll

देख के, तेरी किरपा मेरी, आँखे रोई ll

तूँ जाने, देने का क्या है ll बहाना तेरा

हर पल दा, ओ दातिया ll

यह, अहसास है, मुझको यही, दिल ने माना ll

तेरी, किरपा बड़ी, दाता मेरा, छोटा शुक्राना ll

तूँ मुस्काए, तो होता है ll मुस्काना मेरा

हर पल दा, ओ दातिया ll

तेरी किरपा, की छाया हो, ज्ञान के सर पे ll

कहे, पुनीत मैं बैठा रहूँ, बस तेरे दर पे ll

शायद तुझको, भा गया है* ll झुक जाना मेरा

हर पल दा, ओ दातिया ll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।