शुक्र बीज मंत्र

संत सूरदास
अन्य मंत्र Mantra Shukra Beej Mantra Mantra
॥ पावन पाठ ॥

श्री शुक्र का मंत्र - कमजोर शुक्र जीवन में सुख-सुविधाओं की कमी का कारण बन सकता है। मूत्र संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में शुक्र मंत्रों का जाप करना चाहिए। शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से शुक्र मंत्रों का जाप शुरू करना चाहिए। शुक्र मंत्रों का जाप सूर्योदय के समय करना चाहिए।

शुक्र बीज मंत्र

ऊँ ह्रीं श्रीं शुक्राय नम:

ऊँ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:

ऊँ वस्त्रं मे देहि शुक्राय स्वाहा

शुक्र का वैदिक मंत्र

ऊँ अन्नात्परिस्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत क्षत्रं पय: सेमं प्रजापति: ।

ऋतेन सत्यमिन्दियं विपान ग्वं, शुक्रमन्धस इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोय्मृतं मधु ।

नाम मंत्र

ऊँ शुं शुक्राय नम:

शुक्र का पौराणिक मंत्र

ऊँ हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम ।"

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

शुक्र बीज मंत्र - Shukra Beej Mantra

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।