श्रीनाथ बनके दीनानाथ बनके चले आना प्रभुजी चले आना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

श्रीनाथ बनके दीनानाथ बनके,

चले आना प्रभुजी चले आना ॥

तुम बालकृष्ण रूप में आना,

वैष्णव को दर्श दिखाना,

गोवर्धन नाथ बनके,

गिरिवर हाथ धरके,

चले आना प्रभुजी चले आना,

श्रींनाथ बनके दीनानाथ बनके,

चले आना प्रभुजी चले आना ॥

तुम वृन्दावन में आना,

संग राधाजी को लाना,

व्रजनाथ बनके राधाकांत बनके,

चले आना प्रभुजी चले आना,

श्रींनाथ बनके दीनानाथ बनके,

चले आना प्रभुजी चले आना ॥

तुम गोकुल मथुरा में आना,

बाललीला अपनी दिखाना,

गोकुलनाथ बनके यदुनाथ बनके,

चले आना प्रभुजी चले आना,

श्रींनाथ बनके दीनानाथ बनके,

चले आना प्रभुजी चले आना ॥

मेरे मनमंदिर में आना,

श्रद्धा का दीप जलाना,

सारे दोष हरले मुझे अपना करले,

चले आना प्रभुजी चले आना,

श्रींनाथ बनके दीनानाथ बनके,

चले आना प्रभुजी चले आना ॥

श्रीनाथ बनके दीनानाथ बनके,

॥ दोहा ॥

चले आना प्रभुजी चले आना ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।