ॐ जय श्री यमुना माता आरती

इंद्रेश जी महाराज
माँ गंगा भजन भजन इंद्रेश जी महाराज
॥ दोहा ॥

कालिंदी कलि मल हरणि, यम यातना विनाशिनी।
इंद्रेश वंदन करे सदा, कृष्ण प्रेम प्रकाशनी॥

॥ चौपाई ॥

ॐ जय श्री यमुना माता, मैया जय श्री यमुना माता।
जो जन तुमको ध्यावे, सुख संपत्ति पाता॥
ॐ जय श्री यमुना माता॥

सूर्य सुता कलि कलुष विनाशिनी, पावन निर्मल नीरा।
मथुरा गोकुल वृंदावन में, बहती मंद गंभीरा॥
ॐ जय श्री यमुना माता॥

कृष्ण प्रिया तुम अति सुखदाई, ब्रज मंडल की रानी।
असन वसन सब दिव्य तिहारे, अमृत सम जल पानी॥
ॐ जय श्री यमुना माता॥

यम की भगिनी तुम कल्याणी, भव भय भंजन हारी।
स्नान करे जो पावन तट पर, तर जाए नर नारी॥
ॐ जय श्री यमुना माता॥

इंद्रेश कहे मैया कृपा कीजो, चरणों में अनुराग।
निसदिन यमुना जल आचमन, जागे सोयो भाग॥
ॐ जय श्री यमुना माता॥

॥ दोहा ॥

श्री यमुना महारानी की, आरती गावे जोय।
इंद्रेश कृष्ण के धाम में, नित्य निवास सो होय॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

सूर्यपुत्री और भगवान श्री कृष्ण की परम प्रिया श्री यमुना जी की नित्य पावन दीप आरती।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।