श्री तुलसी नामाष्टक स्तोत्रम्

संत तुलसीदास
श्री कृष्ण स्तोत्र Mantra Namavali Mantra
॥ पावन पाठ ॥

वृंदा, वृन्दावनी, विश्वपुजिता, विश्वपावनी ।

पुष्पसारा, नंदिनी च तुलसी, कृष्णजीवनी ॥

एत नाम अष्टकं चैव स्त्रोत्र नामार्थ संयुतम ।

य:पठेत तां सम्पूज्य सोभवमेघ फलं लभेत ॥

वृन्दायै नमः ।

वृन्दावन्यै नमः ।

विश्वपूजितायै नमः ।

विश्वपावन्यै नमः ।

पुष्पसारायै नमः ।

नन्दिन्यै नमः ।

तुलस्यै नमः ।

॥ दोहा ॥

कृष्णजीवन्यै नमः ॥8

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।