श्री तुळजा अंबाई आरती

पारंपरिक
महादेव आरती Aarti Tulja Bhavani Aarti
॥ पावन पाठ ॥

जय देवी जय देवी तुळजा अंबाई ।

चंड मुंड वधुनिया महिषासुर वधुनिया ।

ठेविलासे तुझे पायी ॥ धृ ॥

वाघावर स्वार झाली, हाती सोन्याचे गोट ।

बाजूबंद दंडामधी, शोभती गोमटे ।

जय देवी जय देवी तुळजा अंबाई ॥ १ ॥

आई तुझे दरबारी, लाख खंडीभर तेल ।

जैसे कोदीमध्ये (कुंडामध्ये), प्रकाश हा फाकला।

जय देवी जय देवी तुळजा अंबाई ॥ २ ॥

संतो की वाणी लिरिक्स

कवड्याची गळी माळ, करते भक्तांचा संभाळ ।

तुळजापूरची माता भवानी, आरती करतो नेमाने ।

जय देवी जय देवी तुळजा अंबाई ॥ ३ ॥

जय देवी जय देवी तुळजा भवानी ।

चंड मुंड वधुनिया महिषासुर वधुनिया ।

॥ दोहा ॥

ठेविलासे तुझे पायी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।