श्री सूर्य देव - जय जय रविदेव (Shri Surya Dev - Jai Jai Ravidev)

संत सूरदास
अन्य आरती Aarti Surya Dev Aarti
॥ पावन पाठ ॥

जय जय जय रविदेव,

जय जय जय रविदेव ।

रजनीपति मदहारी,

शतलद जीवन दाता ॥

पटपद मन मदुकारी,

हे दिनमण दाता ।

जग के हे रविदेव,

जय जय जय स्वदेव ॥

नभ मंडल के वाणी,

ज्योति प्रकाशक देवा ।

निजजन हित सुखराशी,

तेरी हम सब सेवा ॥

करते हैं रविदेव,

जय जय जय रविदेव ।

कनक बदन मन मोहित,

रुचिर प्रभा प्यारी ॥

नित मंडल से मंडित,

अजर अमर छविधारी ।

हे सुरवर रविदेव,

जय जय जय रविदेव ॥

जय जय जय रविदेव,

जय जय जय रविदेव ।

रजनीपति मदहारी,

॥ दोहा ॥

शतलद जीवन दाता ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।