श्री शनि देव: आरती कीजै नरसिंह कुंवर की

संत तुलसीदास
श्री कृष्ण आरती Aarti Shri Shani Aarti
॥ पावन पाठ ॥

आरती कीजै नरसिंह कुंवर की ।

वेद विमल यश गाउँ मेरे प्रभुजी ॥

पहली आरती प्रह्लाद उबारे ।

हिरणाकुश नख उदर विदारे ॥

दुसरी आरती वामन सेवा ।

बल के द्वारे पधारे हरि देवा ॥

तीसरी आरती ब्रह्म पधारे ।

सहसबाहु के भुजा उखारे ॥

चौथी आरती असुर संहारे ।

भक्त विभीषण लंक पधारे ॥

पाँचवीं आरती कंस पछारे ।

गोपी ग्वाल सखा प्रतिपाले ॥

तुलसी को पत्र कंठ मणि हीरा ।

॥ दोहा ॥

हरषि-निरखि गावे दास कबीरा ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।