॥ दोहा ॥
गोविंद जय जय गोपाल जय जय।
राधा रमण हरि गोविंद जय जय॥
॥ चौपाई ॥
श्री राधे गोपाल भजमन श्री राधे।
श्री राधे गोविंद भजमन श्री राधे॥
नंद के दुलारे यशुदा के प्यारे।
गोपियों के संग रास रचैया हमारे॥
मुरली मनोहर कृष्ण कन्हैया।
श्री राधे गोपाल भजमन श्री राधे॥
वृंदावन के कुंज गलिन में।
गैया चरावे यमुना तट पर॥
माखन चोर चितचोर कन्हैया।
श्री राधे गोपाल भजमन श्री राधे॥
मृदुल कृष्ण प्रभु तेरे गुण गावे।
श्यामा श्याम का ध्यान लगावे॥
प्रेम सुधा रस बरसे निशदिन।
श्री राधे गोपाल भजमन श्री राधे॥
॥ दोहा ॥
भज गोविंद गोपाल मन, भज श्री कुंजबिहारी।
मृदुल कृष्ण जीवन सफल, कृपा करो गिरधारी॥