श्री राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र - मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणी

पूजा सखी
श्री कृष्ण भजन भजन पूजा सखी
॥ दोहा ॥

उर्ध्वम् अधरं च सर्वत्र, राधा नाम मयं जगत्।
पूजा सखी गावे स्तुति, पावे युगल पदारथम्॥

॥ चौपाई ॥

मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणी प्रसूनविपिनेश्वरी नमामि पद्मलोचने।
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥

अशोकवृक्षवल्लरी वितानमण्डपस्थिते प्रवालहेममालिनी रसालपद्मषट्पदे।
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥

अनंगरंगमंगल प्रसंगभंगुरिभ्रुवां सविभ्रमं ससंभ्रमं दृगंचलप्रपातनैः।
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥

तडिद्विचित्रवस्त्रकान्ति मण्डितांगमण्डले सुवर्णगंडयुग्ममण्डितास्यपद्मषट्पदे।
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥

नितम्बबिम्बलम्बित स्वतंत्ररत्नमेखले कलाकलापकोमला विचित्रनर्तकप्रिये।
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥

अनेकदेवदैत्यदर्पदलनोद्यत्प्रतापिते त्रिविष्टपाधिपप्रियार्चितांघ्रिपद्मषट्पदे।
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥

पूजा सखी भाव मग्न होय, पाठ करे निसदिन जोई।
श्री राधिका कृपा कटाक्ष, सहजहिं प्राप्त सो होई॥
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥

॥ दोहा ॥

श्री राधा कृपा कटाक्ष का, जो गावे रस लाय।
पूजा सखी श्री निकुंज में, नित्य वास सो पाय॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

पूजा सखी द्वारा सुमधुर भाव से गाया जाने वाला श्री राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।