श्री मल्लिकार्जुन मंगलाशासनम्

पारंपरिक
श्री राम मंत्र Mantra Tandav Mantra
॥ पावन पाठ ॥

उमाकांताय कांताय कामितार्थ प्रदायिने

श्रीगिरीशाय देवाय मल्लिनाथाय मंगलम् ॥

सर्वमंगल रूपाय श्री नगेंद्र निवासिने

गंगाधराय नाथाय श्रीगिरीशाय मंगलम् ॥

सत्यानंद स्वरूपाय नित्यानंद विधायने

स्तुत्याय श्रुतिगम्याय श्रीगिरीशाय मंगलम् ॥

मुक्तिप्रदाय मुख्याय भक्तानुग्रहकारिणे

सुंदरेशाय सौम्याय श्रीगिरीशाय मंगलम् ॥

श्रीशैले शिखरेश्वरं गणपतिं श्री हटकेशं

पुनस्सारंगेश्वर बिंदुतीर्थममलं घंटार्क सिद्धेश्वरम् ।

गंगां श्री भ्रमरांबिकां गिरिसुतामारामवीरेश्वरं

शंखंचक्र वराहतीर्थमनिशं श्रीशैलनाथं भजे ॥

हस्तेकुरंगं गिरिमध्यरंगं शृंगारितांगं गिरिजानुषंगम्

॥ दोहा ॥

मूर्देंदुगंगं मदनांग भंगं श्रीशैललिंगं शिरसा नमामि ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।