श्री कुबेर जी आरती - जय कुबेर स्वामी (Shri Kuber Aarti, Jai Kuber Swami)

पारंपरिक
महादेव आरती Aarti Kuber Aarti
॥ पावन पाठ ॥

जय कुबेर स्वामी,

प्रभु जय कुबेर स्वामी,

हे समरथ परिपूरन ।

हे समरथ परिपूरन ।

हे अन्तर्यामी ॥

ॐ जय कुबेर स्वामी

प्रभु जय कुबेर स्वामी..

जय कुबेर स्वामी,

प्रभु जय कुबेर स्वामी,

हे समरथ परिपूरन । -x2

हे अन्तर्यामी ।

ॐ जय कुबेर स्वामी

प्रभु जय कुबेर स्वामी..

विश्रवा के लाल इदविदा के प्यारे,

माँ इदविदा के प्यारे,

कावेरी के नाथ हो । -x2

शिवजी के दुलारे ।

ॐ जय कुबेर स्वामी

प्रभु जय कुबेर स्वामी..

मनिग्रवी मीनाक्षी देवी,

नलकुबेर के तात,

प्रभु नलकुबेर के तात

देवलोक में जागृत । -x2

आप ही हो साक्षात ।

ॐ जय कुबेर स्वामी

प्रभु जय कुबेर स्वामी..

रेवा नर्मदा तट

शोभा अतिभारी

प्रभु शोभा अतिभारी

करनाली में विराजत । -x2

भोले भंडारी ।

ॐ जय कुबेर स्वामी

प्रभु जय कुबेर स्वामी..

वंध्या पूत्र रतन और

निर्धन धन पाये

सब निर्धन धन पाये

मनवांछित फल देते । -x2

जो मन से ध्याये ।

ॐ जय कुबेर स्वामी

प्रभु जय कुबेर स्वामी..

सकल जगत में तुम ही

सब के सुखदाता

प्रभु सब के सुखदाता

दास जयंत कर वन्दे । -x2

जाये बलिहारी ।

ॐ जय कुबेर स्वामी

प्रभु जय कुबेर स्वामी..

जय कुबेर स्वामी,

प्रभु जय कुबेर स्वामी,

हे समरथ परिपूरन ।

हे समरथ परिपूरन ।

हे अन्तर्यामी ॥

ॐ जय कुबेर स्वामी

प्रभु जय कुबेर स्वामी..

श्री कुबेर जी दूसरी प्रसिद्ध आरती ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे | लक्ष्मी माता की आरती

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।