श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा

बिल्वमंगल ठाकुर / पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन भजन कृष्ण
॥ दोहा ॥

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा।
एक मात स्वामी सखा हमारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥

॥ चौपाई ॥

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥

बंदीगृह के तुम अवतारी, जन्मे कंस विदारण हारी।
ऋषि मुनि सब जयकार पुकारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
श्री कृष्ण गोविंद...

द्रौपदी की प्रभु लाज बचाई, चीर बढ़ायो आप कन्हाई।
गज के तुम संकट निवारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
श्री कृष्ण गोविंद...

अर्जुन रथ के सारथी भए, गीता ज्ञान अमोल सुनाए।
भक्त जनों के काज संवारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
श्री कृष्ण गोविंद...

॥ दोहा ॥

गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है।
श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो है॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भगवान श्री कृष्ण के पावन नामों की यह दिव्य नामावली भक्त को संकटों में अभय और परम शांति प्रदान करती है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।