॥ दोहा ॥
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा।
एक मात स्वामी सखा हमारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
॥ चौपाई ॥
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
बंदीगृह के तुम अवतारी, जन्मे कंस विदारण हारी।
ऋषि मुनि सब जयकार पुकारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
श्री कृष्ण गोविंद...
द्रौपदी की प्रभु लाज बचाई, चीर बढ़ायो आप कन्हाई।
गज के तुम संकट निवारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
श्री कृष्ण गोविंद...
अर्जुन रथ के सारथी भए, गीता ज्ञान अमोल सुनाए।
भक्त जनों के काज संवारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
श्री कृष्ण गोविंद...
॥ दोहा ॥
गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है।
श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो है॥