श्री झूलेलाल आरती- ॐ जय दूलह देवा

पारंपरिक
अन्य आरती Aarti Shri Jhulelal Aarti
॥ पावन पाठ ॥

चेटी चंड जैसे त्यौहारों तथा सिंधी समाज के अन्य कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा गाई जाने वाली आरती। भगवान झूलेलाल के प्रत्येक मंदिर में यह आरती सुवह-शाम अवश्य गायी जाती है। भगवान झूलेलाल को लाल साई, उदेरो लाल, वरुण देव, दूलह लाल, दरिया लाल और जिंदा पीर भी कहा जाता है।

ॐ जय दूलह देवा,

साईं जय दूलह देवा ।

पूजा कनि था प्रेमी,

सिदुक रखी सेवा ॥

तुहिंजे दर दे केई,

सजण अचनि सवाली ।

दान वठन सभु दिलि,

सां कोन दिठुभ खाली ॥

॥ ॐ जय दूलह देवा...॥

अंधड़नि खे दिनव,

अखडियूँ - दुखियनि खे दारुं ।

पाए मन जूं मुरादूं,

सेवक कनि थारू ॥

॥ ॐ जय दूलह देवा...॥

फल फूलमेवा सब्जिऊ,

पोखनि मंझि पचिन ।

तुहिजे महिर मयासा अन्न,

बि आपर अपार थियनी ॥

॥ ॐ जय दूलह देवा...॥

ज्योति जगे थी जगु में,

लाल तुहिंजी लाली ।

अमरलाल अचु मूं वटी,

हे विश्व संदा वाली ॥

॥ ॐ जय दूलह देवा...॥

जगु जा जीव सभेई,

पाणिअ बिन प्यास ।

जेठानंद आनंद कर,

पूरन करियो आशा ॥

ॐ जय दूलह देवा,

साईं जय दूलह देवा ।

पूजा कनि था प्रेमी,

॥ दोहा ॥

सिदुक रखी सेवा ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।