पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविन्द शरण महाराज

पारंपरिक
श्री कृष्ण संत साहित्य Bhakt Pujya Shri Hit Premanand Govind Sharan Maharaj Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल | पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविन्द शरण महाराज

असली नाम - अनिरुद्ध कुमार पाण्डेय

अन्य नाम - पिले बाबा, पूज्य महाराज जी, आनंदस्वरूप ब्रह्मचारी

आतंरिक सहचरी नाम - प्रियवादिनी सहचरी

गुरु - श्री गौरांगी शरण जी महाराज

आराध्य - श्री कृष्ण, श्री राम

जन्म स्थान - अखरी गांव, सरसोल ब्लॉक, कानपुर, उत्तर प्रदेश

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

भाषा - हिन्दी

पिता - श्री शंभू पाण्डेय

माता - श्रीमती रमा देवी

प्रसिद्ध - आध्यात्मिक गुरु, हिन्दू धर्म प्रचारक, कथा वाचक

पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण महाराज जी का जन्म 1970 में कानपुर उत्तर प्रदेश में हुआ था। कम उम्र में ही उन्होंने जीवन के उद्देश्य पर सवाल उठाना शुरू कर दिया था। वह इस विचार से द्रवित हो उठा कि क्या माता-पिता का प्रेम चिरस्थायी है और यदि नहीं है तो अस्थाई सुख में क्यों लगे?

उन्होंने स्कूल में पढ़ने और भौतिकवादी ज्ञान प्राप्त करने के महत्व पर सवाल उठाया और बताया कि यह कैसे उन्हें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा। उत्तर खोजने के लिए उन्होंने श्री राम जय राम जय जय राम और श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी का जाप करना शुरू कर दिया।

महाराज जी अपने शिष्य या वृन्दावन की प्रजा से बहुत प्रेम करते हैं। महाराज जी के मुख से निकले वचन या कथा बड़े से बड़े पापी को भी धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविन्द शरण महाराज | Pujya Shri Hit Premanand Govind Sharan Maharaj

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।