गौमता आरती

पारंपरिक
अन्य आरती Aarti Shri Gaumata Aarti
॥ पावन पाठ ॥

श्री गौमता जी की आरती

आरती श्री गैय्या मैंय्या की,

आरती हरनि विश्‍व धैय्या की ॥

अर्थकाम सद्धर्म प्रदायिनि,

अविचल अमल मुक्तिपददायिनि ।

सुर मानव सौभाग्य विधायिनि,

प्यारी पूज्य नंद छैय्या की ॥

आरती श्री गैय्या मैंय्या की,

आरती हरनि विश्‍व धैय्या की ॥

अख़िल विश्‍व प्रतिपालिनी माता,

मधुर अमिय दुग्धान्न प्रदाता ।

रोग शोक संकट परित्राता,

भवसागर हित दृढ़ नैय्या की ॥

आरती श्री गैय्या मैंय्या की,

आरती हरनि विश्‍व धैय्या की ॥

आयु ओज आरोग्य विकाशिनि,

दुख दैन्य दारिद्रय विनाशिनि ।

सुष्मा सौख्य समृद्धि प्रकाशिनि,

विमल विवेक बुद्धि दैय्या की ॥

आरती श्री गैय्या मैंय्या की,

आरती हरनि विश्‍व धैय्या की ॥

सेवक जो चाहे दुखदाई,

सम पय सुधा पियावति माई ।

शत्रु मित्र सबको दुखदायी,

स्नेह स्वभाव विश्‍व जैय्या की ॥

आरती श्री गैय्या मैंय्या की,

आरती हरनि विश्‍व धैय्या की ॥

आरती श्री गैय्या मैंय्या की,

॥ दोहा ॥

आरती हरनि विश्‍व धैय्या की ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।