श्री देवकीनंदन ठाकुर जी

पारंपरिक
श्री कृष्ण संत साहित्य Bhakt Shri Devkinandan Thakur Ji Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल | श्री देवकीनंदन ठाकुर जी

वास्तविक नाम - श्री देवकीनंदन ठाकुर

अन्य नाम - श्री देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज

गुरु - आचार्य पुरुषोत्तम शरण शास्त्री

आराध्य - श्रीकृष्ण

जन्म - 12 सितम्बर 1978

जन्म स्थान - ओहावा गाँव, मथुरा, उत्तर प्रदेश

वैवाहिक स्थिति - विवाहित

पिता - राजवीर शर्मा

माता - श्रीमति अनसुईया देवी

पत्नी - श्रीमती अंदमाता

भाषा - हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत

प्रसिद्धि - हिंदू पुराण कथावाचक, गायक और एक आध्यात्मिक गुरु

देवकीनंदन ठाकुर महाराज एक हिंदू पुराण कथावाचक, गायक और आध्यात्मिक गुरु हैं। वर्ष 1997 से महाराज श्री श्रीमद भागवत कथा, श्री राम कथा, देवी भागवत, शिव पुराण कथा, भगवत गीता इत्यादि पर प्रवचन देते आ रहे हैं। सबसे लोकप्रिय और सबसे अधिक भुगतान पाने वाले भागवत कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर महाराज को शांति दूत, धर्म रतन आदि के लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। ठाकुर महाराज मात्र 6 साल की उम्र में घर छोड़कर वृंदावन पहुंच गये और ब्रज के रासलीला संस्थान में हिस्सा ले लिया।

धर्मार्थ कार्यों के लिए देवकीनंदन ठाकुर उत्तरप्रदेश रत्न से भी सम्मानित किया गया है। ये अवॉर्ड उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने दिया था। देवकीनन्दन ठाकुर जी ने वृंदावन में एक कृष्ण राधा का मंदिर भी बनाया है जो काफी सुन्दर है। ये अपनी कथाओ को अपने YouTube चैनल से लाइव भी चलते है।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

देवकीनंदन ठाकुर महाराज एक हिंदू पुराण कथावाचक, गायक और आध्यात्मिक गुरु हैं। वर्ष 1997 से महाराज श्री श्रीमद भागवत कथा, श्री राम कथा, देवी भागवत, शिव पुराण कथा, भगवत गीता इत्यादि पर प्रवचन देते आ रहे हैं। सबसे लोकप्रिय और सबसे अधिक भुगतान पाने वाले भागवत कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर महाराज को शांति दूत, धर्म रतन आदि के लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। Devkinandan Thakur Maharaj is a Hindu Puranic storyteller, singer and spiritual teacher. Since the year 1997, Maharaj has been giving discourses on Shri Shrimad Bhagwat Katha, Shri Ram Katha, Devi Bhagwat, Shiv Puran Katha, Bhagwat Geeta etc. The most popular and highest paid Bhagwat Katha reader Devkinandan Thakur Maharaj has been awarded honorary doctorates for Shanti Doot, Dharma Ratan etc.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।