श्री चित्रगुप्त स्तुति

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती Aarti Shri Chitragupt Aarti
॥ पावन पाठ ॥

जय चित्रगुप्त यमेश तव,

शरणागतम् शरणागतम् ।

जय पूज्यपद पद्मेश तव,

शरणागतम् शरणागतम् ॥

जय देव देव दयानिधे,

जय दीनबन्धु कृपानिधे ।

कर्मेश जय धर्मेश तव,

शरणागतम् शरणागतम् ॥

जय चित्र अवतारी प्रभो,

जय लेखनीधारी विभो ।

जय श्यामतम, चित्रेश तव,

शरणागतम् शरणागतम् ॥

पुर्वज व भगवत अंश जय,

कास्यथ कुल, अवतंश जय ।

जय शक्ति, बुद्धि विशेष तव,

शरणागतम् शरणागतम् ॥

जय विज्ञ क्षत्रिय धर्म के,

ज्ञाता शुभाशुभ कर्म के ।

जय शांति न्यायाधीश तव,

शरणागतम् शरणागतम् ॥

जय दीन अनुरागी हरी,

चाहें दया दृष्टि तेरी ।

कीजै कृपा करूणेश तव,

शरणागतम् शरणागतम् ॥

तब नाथ नाम प्रताप से,

छुट जायें भव, त्रयताप से ।

हो दूर सर्व कलेश तव,

शरणागतम् शरणागतम् ॥

जय चित्रगुप्त यमेश तव,

शरणागतम् शरणागतम् ।

जय पूज्य पद पद्येश तव,

शरणागतम् शरणागतम् ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।