श्री चित्रगुप्त जी की आरती - श्री विरंचि कुलभूषण (Shri Chitragupt Aarti - Shri Viranchi Kulbhusan)

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती Aarti Shri Chitragupt Aarti
॥ पावन पाठ ॥

श्री विरंचि कुलभूषण,

यमपुर के धामी ।

पुण्य पाप के लेखक,

चित्रगुप्त स्वामी ॥

सीस मुकुट, कानों में कुण्डल,

अति सोहे ।

श्यामवर्ण शशि सा मुख,

सबके मन मोहे ॥

भाल तिलक से भूषित,

लोचन सुविशाला ।

शंख सरीखी गरदन,

गले में मणिमाला ॥

अर्ध शरीर जनेऊ,

लंबी भुजा छाजै ।

कमल दवात हाथ में,

पादुक परा भ्राजे ॥

नृप सौदास अनर्थी,

था अति बलवाला ।

आपकी कृपा द्वारा,

सुरपुर पग धारा ॥

भक्ति भाव से यह,

आरती जो कोई गावे ।

मनवांछित फल पाकर,

॥ दोहा ॥

सद्गति पावे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।