श्री भगवत भगवान की है आरती!

पारंपरिक
विष्णु भगवान आरती Aarti Bhagwat Aarti
॥ पावन पाठ ॥

श्री भगवत भगवान की है आरती,

पापियों को पाप से है तारती।

ये अमर ग्रन्थ ये मुक्ति पन्थ,

ये पंचम वेद निराला,

नव ज्योति जलाने वाला।

हरि नाम यही हरि धाम यही,

यही जग मंगल की आरती

पापियों को पाप से है तारती॥

॥ श्री भगवत भगवान की है आरती...॥

ये शान्ति गीत पावन पुनीत,

पापों को मिटाने वाला,

हरि दरश दिखाने वाला।

यह सुख करनी, यह दुःख हरिनी,

श्री मधुसूदन की आरती,

पापियों को पाप से है तारती॥

॥ श्री भगवत भगवान की है आरती...॥

ये मधुर बोल, जग फन्द खोल,

सन्मार्ग दिखाने वाला,

बिगड़ी को बनानेवाला।

श्री राम यही, घनश्याम यही,

यही प्रभु की महिमा की आरती

पापियों को पाप से है तारती॥

॥ श्री भगवत भगवान की है आरती...॥

श्री भगवत भगवान की है आरती,

पापियों को पाप से है तारती।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।