श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं

पूजा सखी
श्री कृष्ण भजन भजन पूजा सखी
॥ दोहा ॥

आरती बांके बिहारी की, जो गावे मन लाय।
पूजा सखी भव सिंधु से, सहज ही पार पराय॥

॥ चौपाई ॥

श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं।
कुंजबिहारी तेरी आरती गाऊं॥
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं॥

मोर मुकुट प्यारे शीश पे सोहे।
प्यारी बंशी मेरो मन मोहे॥
देखि छबि बलिहारी मैं जाऊं।
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं॥

चरणों से निकली गंगा प्यारी।
जिसने सारी दुनिया तारी॥
उन चरणों में शीश नवाऊं।
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं॥

दास अनाथ के नाथ आप हो।
दुख भंजन सुख के दाता हो॥
आरती गाकर प्रभु तोहे मनाऊं।
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं॥

पूजा सखी गावे आरती तिहारी।
सदा कृपा रखना बांके बिहारी॥
प्रेम सुधा नित नयनों पाऊं।
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं॥

॥ दोहा ॥

कर्पूर गौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

ठाकुर श्री बांके बिहारी जी की पावन दीप आरती एवं नख-शिख वंदना।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।