शिवरात्रि की महिमा अपार

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

शिवरात्रि की महिमा अपार,

पूजा शिव की करो,

तीनो लोक ही जिसको पूजे,

सच्चे मन से मिलके सारे,

शिव का जाप करो,

शिव का जाप करो,

शिवरात्रि की महीमा अपार

पूजा शिव की करो ॥

शिव भक्ति से भाग्य का द्वारा,

पल में है खुल जाता,

जन्म जन्म के पाप है धुलते,

जो माँगो मिल जाता,

घट घट की शिव जाने रे,

मुख से कहो ना कहो,

तीनो लोक ही जिसको पूजे,

सच्चे मन से मिलके सारे,

शिव का जाप करो,

शिव का जाप करो,

शिवरात्रि की महीमा अपार

पूजा शिव की करो ॥

सुखदाता शिव संकट हरता,

शिव भोले भंडारी,

दीनदयाल वो करुणा सागर,

सुनते सदा हमारी,

शिव को बस वो ही पाएँगे,

शिव को ध्याएँगे जो,

तीनो लोक ही जिसको पूजे,

सच्चे मन से मिलके सारे,

शिव का जाप करो,

शिव का जाप करो,

शिवरात्रि की महीमा अपार

पूजा शिव की करो ॥

शिवरात्रि की महिमा अपार,

पूजा शिव की करो,

तीनो लोक ही जिसको पूजे,

सच्चे मन से मिलके सारे,

शिव का जाप करो,

शिव का जाप करो,

शिवरात्रि की महीमा अपार

॥ दोहा ॥

पूजा शिव की करो ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।