शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

संत सूरदास
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

आत्मा ने परमात्मा को लिया

देख ध्यान की दृष्टि से ।

प्रकाश हुआ हृदय-हृदय,

बेड़ा पार हुआ इस सृष्टि से ।

है एक ओंकार निरंजन निरंकार,

है अजर अमर आकर

विश्वधार मन भजे ।

शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

भूख में तपसी तप रहा,

भोजन बीच पठाय ।

विलप में साधु हंस रहा,

अपना ही उपजा खाय ।

शेष अशेष विशेष में

समर्पण के भाव में ।

शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

ठहर शांत एकांत में,

साधके मूलाधार ।

सर्जन स्वाधिष्ठान से,

सूर्य मणि चमकार ।

विशुद्धि आज्ञा सहसरार

तक गूंजे अनाहत ।

शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

खाली को तो भर दिया,

भरे में भरा न जाए ।

पानी में प्यासा रहा,

तट पे बैठ लखाय ।

प्रष्न व्यस्न में उलझ-उलझ

हां बिरथा गया जन्म ।

शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।