शिव में मिलना हैं

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ दोहा ॥

शिव में मिलना है ॥

॥ चौपाई ॥

दोहा – कितना रोकूं मन के शोर को,

ये कहा रुकता है,

की शोर से परे,

उस मौन से मिलना है,

मुझे शिव से भी नहीं,

शिव में मिलना हैं ॥

मुझे शिव से नहीं,

शिव में मिलना है,

अपने अहम की,

आहुति दे जलना है,

मुझे शिव से नहीं,

शिव में मिलना हैं ॥

क्यों मुझे किसी और के,

कष्टों का कारण बनना है,

चाँद जो शीश सुशोभित,

उस चाँद सा शीतल बनना है,

उस चाँद सा शीतल बनना है,

मुझे शिव से नहीं,

शिव में मिलना हैं ॥

जितना मैं भटका,

उतना मैला हो आया हूँ,

कुछ ने है छला मोहे,

कुछ को मैं छल आया हूँ,

कुछ को मैं छल आया हूँ,

मुझे शिव से नहीं,

शिव में मिलना हैं ॥

मुझे शिव से नहीं,

शिव में मिलना हैं,

अपने अहम की,

आहुति दे जलना है,

मुझे शिव से नहीं,

॥ दोहा ॥

शिव में मिलना हैं ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।