शिव क्षमा प्रार्थना

पारंपरिक
महादेव मंत्र Mantra Shiv Kshama Prarthana Stotra Mantra
॥ पावन पाठ ॥

मृत्युञ्जय महारुद्र त्राहि मां शरणागतम्

जन्म मृत्युजरारोगैः पीड़ितं कर्म बन्धनैः ॥१॥

मन्त्रेणाक्षर हीनेन पुष्पेण विफलेन च

पूजितोसि महादेव तत्सर्वं क्षम्यतां मम ॥२॥

करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा

श्रवननयंजं वा मानसं वापराधम् ॥३॥

संतो की वाणी लिरिक्स

विहितमविहितं वा सर्वमेतत क्षमस्व

जय जय करुणाब्धे श्री महादेवशम्भो ॥४॥

आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम्

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व महेश्वरः ॥५॥

अन्यथा शरणं नास्ति, त्वमेव शरणं मम्।

तस्मात्कारूणयभावेन रक्षस्व पार्वतीनाथः ॥६॥

गतं पापं गतं दुःखं गतं दारिद्रयमेव च

आगता सुख सम्पतिः पुण्याच्च तव दर्शनात् ॥७॥

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर !

यत्पूजितम् मया देव परिपूर्ण तदस्तु मे ॥८॥

हरहर महादेव यदक्षरंपदं भ्रष्टं मात्राहीनं च यद्भवेत्।

॥ दोहा ॥

तत्सर्वं क्षम्यतां देव प्रसीद शिवशंकर ॥९॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।