शिव दयाल सिंह

संत तुलसीदास
श्री कृष्ण संत साहित्य Bhakt Shiv Dayal Singh Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल | शिव दयाल सिंह

वास्तविक नाम - श्री सेठ शिव दयाल सिंह

अन्य नाम - परम पुरुष पूरन धनी हुजूर स्वामी जी महाराज, शिव दयाल सिंह जी महाराज, स्वामी शिव दयाल सिंह जी महाराज

आराध्य - राधा कृष्ण

गुरु - तुलसी साहेब

जन्मतिथि - 25 अगस्त 1818

जन्म स्थान - पन्नी गली, आगरा, सीडेड प्रांत, ब्रिटिश भारत

मृत्यु - 15 जून 1878 पन्नी गली, आगरा, उत्तर-पश्चिमी प्रांत, ब्रिटिश भारत

वैवाहिक स्थिति - विवाहित

भाषा - हिंदी, उर्दू, फ़ारसी और गुरुमुखी, अरबी और संस्कृत

पिता - सेठ दिलवाली सिंह

माता - माता महामाया

पत्नी - नरैनी देवी

दर्शन - राधा स्वामी, संत मत

प्रसिद्ध - राधा स्वामी संप्रदाय के संस्थापक और प्रथम आध्यात्मिक नेता

स्वामी शिव दयाल सिंह जी महाराज 19वीं शताब्दी के दौरान उत्तर भारत में राधा स्वामी सत्संग की संत मत परंपरा के एक प्रभावशाली आध्यात्मिक नेता और प्रस्तावक थे। उन्हें राधा स्वामी आस्था का संस्थापक माना जाता है, जो सूरत शब्द योग, या मानव आत्मा को दिव्य ध्वनि प्रवाह के साथ एकजुट करने के योग पर जोर देता है।

स्वामी शिव दयाल सिंह जी ने आंतरिक प्रकाश और ध्वनि पर ध्यान के माध्यम से आंतरिक आध्यात्मिक विकास का मार्ग सिखाया और उन्होंने कई अनुयायियों को इस अभ्यास में शामिल किया। राधा स्वामी सत्संग के अनुयायी उन्हें एक महान रहस्यवादी और शिक्षक के रूप में पूजते हैं जिन्होंने इस आध्यात्मिक परंपरा को फैलाने में मदद की। उन्होंने सिख धर्म के धर्मग्रंथों और हाथरस के तुलसी साहिब की रचनाओं पर आधारित आध्यात्मिक प्रवचन देना शुरू किया।

उनके शिष्य उन्हें स्नेह से आगरा वाले स्वामीजी भी कहते थे। वह वही सत्य सिखा रहे थे जो सभी पूर्ण गुरुओं ने सिखाया था, प्रेम, भक्ति और ध्यान के माध्यम से, अपने भीतर, अपने सच्चे घर से कैसे जुड़ें।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

शिव दयाल सिंह | Shiv Dayal Singh

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।