शिव भोला भंडारी साधो शिव भोला भंडारी रे

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Bholenath Bhajan
॥ दोहा ॥

शिव भोला, भंडारी साधो, शिव भोला, भंडारी रे ॥

॥ चौपाई ॥

भस्मासुर ने, करी तपस्या, वर दीना, त्रिपुरारी रे ॥

जिसके सिर पर, हाथ लगावे, भस्म होय, तन सारी रे ॥

शिव भोला, भंडारी साधो, शिव भोला, भंडारी रे ॥

संतो की वाणी लिरिक्स

शिव के सिर पर, हाथ धरण की, मन में, दुष्ट बिचारी रे ॥

भागे फिरत, चहुँ दिशि शंकर, लगा दैत्य, डर भारी रे ॥

शिव भोला, भंडारी साधो, शिव भोला, भंडारी रे ॥

गिरिजा रूप, धार हरि बोले, बात असुर से, प्यारी रे ॥

जो तुं मुझको, नाच दिखावे, हो जाऊँ, नार तुम्हारी रे ॥

शिव भोला, भंडारी साधो, शिव भोला, भंडारी रे ॥

नाच करत, अपने सिर कर धर, भस्म भय, मति भारी रे ॥

ब्रम्‍हानंद, देत जो मांगे, शिव भक्तन, हितकारी रे ॥

॥ दोहा ॥

शिव भोला, भंडारी साधो, शिव भोला, भंडारी रे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।