शेरावाली का सच्चा दरबार है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Mata Rani Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

शेरावाली का सच्चा दरबार है,

यहाँ पे भरते भक्तो के भंडार है,

सच्चा दरबार है, भरते भंडार है,

शेरावाली का सच्चा दरबार हैं,

यहाँ पे भरते भक्तो के भंडार है ॥

पर्वत पे एक गुफा के अंदर,

मैया का है प्यारा मंदिर,

मैया का है प्यारा मंदिर,

सिंह सवारी कर के बैठी,

लगती मैया कितनी सुन्दर,

लगती मैया कितनी सुन्दर,

दर्शन करने को आता संसार है,

यहाँ पे भरते भक्तो के भंडार है,

शेरावाली का सच्चा दरबार हैं,

यहाँ पे भरते भक्तो के भंडार है ॥

तीन लोक की है महारानी,

ये जगदम्बा ये ही भवानी,

ये जगदम्बा ये ही भवानी,

बिगड़ी बनाने वाली माँ है,

बड़ी दयालु बड़ी है दानी,

मनचाहा सबको देती उपहार है,

यहाँ पे भरते भक्तो के भंडार है,

शेरावाली का सच्चा दरबार हैं,

यहाँ पे भरते भक्तो के भंडार है ॥

मैया के दर पे जो आए,

चरणों में जो शीश झुकाए,

चरणों में जो शीश झुकाए,

जय माता दी बोल बोल के,

‘सोनू’ जो जयकारे लगाए,

‘सोनू’ जो जयकारे लगाए,

उनका तो हो जाता बेड़ा पार है,

यहाँ पे भरते भक्तो के भंडार है,

शेरावाली का सच्चा दरबार हैं,

यहाँ पे भरते भक्तो के भंडार है ॥

शेरावाली का सच्चा दरबार है,

यहाँ पे भरते भक्तो के भंडार है,

सच्चा दरबार है, भरते भंडार है,

शेरावाली का सच्चा दरबार हैं,

यहाँ पे भरते भक्तो के भंडार है ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।