शेरावाली के दो नैन प्यारे प्यारे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Sherawali Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

शेरवाली के दो नैन प्यारे प्यारे,तेरे मुकुट में चमके सितारे,

अब मुझे गगन से क्या लेना, क्या लेना,

शेरवाली के दो नैन प्यारे प्यारे,तेरे मुकुट में चमके सितारे ॥

तेरा टीका चमचम चमके, तेरी बिंदियो से होता उजाला,

तेरा झुमका दमडम दमके तेरे होने से होता सवेरा,

तेरी शक्ति है अपार तुझको पूजे संसार,

मैया अपनी कृपा दिखा जाना, दिखा जाना,

शेरवाली के दो नैन प्यारे प्यारे,तेरे मुकुट में चमके सितारे ॥

तेरा चोला चमचम चमके, तेरी चुनरी से होता सवेरा,

तेरा नेवर दमडम दमके, तेरी नाथनी से होता सवेरा,

मैया एक तेरा साथ मेरे सिर पे हो हांत,

मैया एक तेरा साथ मेरे सिर पे हो हांत,

मेरा बेड़ा पार लगा जाना, लगा जाना,

शेरवाली के दो नैन प्यारे प्यारे,तेरे मुकुट में चमके सितारे ॥

तेरा कंगना ख़ान ख़ान खनके, तेरी मेहंदी से होता उजाला ॥

तेरी पायल क्षमक्षम क्षमके तेरे बिच्छुवे से होता सवेरा

माँग आए तेरे द्वार लाए सोलह सिंगार,

अब भकती का अलख जगा जाना, जगा जाना,

शेरवाली के दो नैन प्यारे प्यारे,तेरे मुकुट में चमके सितारे ॥

॥ दोहा ॥

शेरवाली के दो नैन प्यारे प्यारे,तेरे मुकुट में चमके सितारे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।