पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित hoy॥
दयामयी माँ कृपा कीजिये, दीन हीन संताने।
तेरे सिवा जग में कोई नाहिं, जो अंतर्मन जाने॥
जय जय दुर्गे मात भवानी, संकट हरणी माता।
चरणन में नित शीश नवाऊँ, हे सुख सम्पत्ति दाता॥
संत समागम परम सुहाई, जहाँ मिले अमृत की थाई।
काम क्रोध मद लोभ मिटावे, निर्मल ज्ञान समाई॥
लाल चुनरिया माँ के सोहे, दीप शिखा उजियारा।
जो ध्यावे सो फल पावे, मिटे कलेश अपारा॥
द्वार तिहारे जो नर आवे, झोली भर ले जावे।
कल्याणी जगदम्बा शेरावाली, सब सुख संपति पावे॥
नानक नाम जहाज है, चढ़े सो उतरे पार।
जो सरधा कर सेवदे, तिन भवजल तारणहार॥