शंकर जी का डमरू बाजे

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

शंकर जी का डमरू बाजे

पार्वती का नंदन नाचे ॥

बर्फीले कैलाशिखर पर,

जय गणेश की धूम

ओ जय हो...

शंकर जी का डमरू बाजे

पार्वती का नंदन नाचे

बर्फीले कैलाशिखर पर,

जय गणेश की धूम

नाचे धिन धिन धिन्तक धिन ॥

नाचे धिन धिन, नाचे धिन धिन,

धिन्तक धिन्तक नाचे

मनमोहक, मनभावन, नटखट

मूषक गण भागे सरपट ॥

विघ्न विनायक, संकट मोचन

वक्रतुंड कजरारे लोचन ॥

झूमे गए बल गणेश

भक्तजनो की कटे कलेश॥

नाचे धिन धिन धिन्तक धिन॥

नाचे धिन धिन, नाचे धिन धिन,

धिन्तक धिन्तक नाचे

सुनकर इतना ज्यादा शोर,

पार्वती आई उस और

डरकर माता उमा के आगे,

दुम दबाकर मूषक भागे

पर अपनी धुन में मस्त गजानन

थिरक रहे है भूलके तन मैं

गणपति बाप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।